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यूपी पुलिस पर हुए सबसे बड़े हमले की “लंका” ढहाई गई…

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रास्ता रोकने वाली जेसीबी से ही ढहाई गई बिकास दुबे की “लंका” 👆     
मकान ध्वस्त करने के साथ ही वाहन भी क्षतिग्रस्त किए गए 👆
राजकीय सम्मान के साथ शहीदों का हुआ अंतिम संस्कार 👆

लखनऊ/कानपुर। पूरे प्रदेश को हिलाकर रख देने वाली बिकरू गांव में हुई सीओ सहित 8 पुलिसकर्मियों की हत्या की लोमहर्षक घटना में हिस्ट्रीशीटर बिकास दुबे के जिस घर की छत से पुलिसकर्मियों पर गोलियां चलाईं गईं थी उस “लंका” को पुलिस ने ढहा दिया है। बिकास दुबे के महलनुमा घर को ढहाने के लिए पुलिस ने उसी जेसीबी की मदद ली जिसे रास्ते में लगाकर पुलिसकर्मियों का रास्ता रोका गया था। खबर लिखे जाने तक गांव में मौजूद भारी पुलिस बल एवं पीएसी की मौजूदगी में जेसीबी से बिकास दुबे के घर को गिराने की कार्यवाही चल रही थी। घर ढहाने के साथ ही वहां मौजूद वाहनों एवं ट्रैक्टर भी छतिग्रस्त कर दिए गए। पुलिस ने घर को खंडहर बनाने से पूर्व घर के अंदर मौजूद नौकरानी, उसके दोनों बच्चों एवं बिकास दुबे के मानसिक रुप से बीमार पिता को घर से बाहर निकालकर उन्हे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया।
उधर चौबेपुर के थानेदार विनय तिवारी की भूमिका संदिग्ध होने के बाद जहां उनसे एसटीएफ लगातार पूछताछ कर रही है, वहीं आईजी कानपुर मोहित अग्रवाल ने अब उन्हे निलंबित भी कर दिया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि जल्द ही उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। विनय तिवारी ने विकास दुबे के खिलाफ एफआईआर न दर्ज कर पीड़ित राहुल को थाने से भगा दिया था। घटना वाली रात एसओ विनय तिवारी पुलिस टीम में सबसे पीछे था और हमले से ठीक पहले वहां से भाग निकला था, इससे वे शक के घेरे में आ गए थे।
लखनऊ में बिकास के भाई के घर फिर पहुंची पुलिस
उधर आज दोपहर लखनऊ में कृष्णानगर स्थित बिकास दुबे के भाई के घर पुलिस एवं एसटीएफ की टीम फिर से पहुंची है और वहां मौजूद महिलाओं से पूछताछ कर रही है। बिकास दुबे के घर बिकरू से बरामद सफेद रंग की यूपी 32 जीबी सीरीज की दो अंबेसडर कारों को नीलामी में खरीदा गया था, परन्तु आज तक इन कारों का नंबर ट्रांसफर नहीं कराया गया था। जबकि नीलामी में खरीदी गई सरकारी गाड़ियों का एक महीने में ट्रांसफर कराना होता है।
विकास के कॉल डिटेल में पुलिसकर्मियों के नंबर
सूत्रों के मुताबिक घटना से पहले 24 घंटे में जिन लोगों से विकास दुबे की बातचीत हुई थी, छानबीन के दौरान कॉल डिटेल में कुछ पुलिसवालों के नंबर भी सामने आए हैं, ये बेहद हैरान करने वाला तथ्य है। पुलिस के शक के घेरे में एक दारोगा, एक सिपाही और एक होमगार्ड है। तीनों की कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस एवं एसटीएफ उनसे पूछताछ कर रही है।
एसओ पर जुआ खिलवाने का लगा था आरोप
कुछ महीने पहले सीओ देवेंद्र मिश्र ने चौबेपुर क्षेत्र में बड़ा जुआ पकड़ा था। मामले में सीओ ने जांच की थी तो पता चला था कि जुआ खिलाने के बदले रकम थानेदार तक पहुंचती है। जिसके बाद उन्होने उसके खिलाफ रिपोर्ट भी लगाई थी। ऐसे कई मामले हैं, जिनकी वजह से सीओ और एसओ के बीच विवाद रहता था। दोनों एक दूसरे से असहमत रहते थे। आईजी कानपुर मोहित अग्रवाल ने कहा है कि कहां पर किसकी चूक रही है या इसमें कोई साजिश है, जांच में दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जमीन कब्जे के मामले की जांच में गई थी पुलिस
बिकास दुबे के विरुद्ध जमीन पर कब्जे की शिकायत राहुल तिवारी ने की थी। उसके अनुसार विकास दुबे ने उसके ससुर लल्लन शुक्ला की जमीन जबरन अपने नाम बैनामा करा ली थी। इसे लेकर उन्होने विकास के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा भी दायर किया था। इसी मुकदमे को वापस लेने का दबाव बनाने के लिए विकास दुबे, सुनील, बाल गोविंद, अमर दुबे, शिवम दुबे ने एक जुलाई को उसे बंधक बना कर पीटा था।
शहीद पुलिसकर्मियों को सम्मान के साथ अंतिम विदाई
बिकरू गांव की घटना में शहीद पुलिसकर्मियों के शव आज उनके गृह जनपदों में पहुंचने के बाद उन्हे अंतिम विदाई देने के लिए भारी समूह उमड़ पड़ा। शहीद पुलिसकर्मियों का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शमशान घाट पर संबंधित जिले के एसएसपी/एसपी एवं एडीएम व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। रायबरेली में आज वनपुरवा गांव में शहीद उप निरीक्षक को श्मशान घाट पर एडीएम, एडीशनल एसपी, एसडीएम, सीओ व स्थानीय विधायक धीरेंद्र सिंह की उपस्थिति में अंतिम विदाई दी गई। शहीद के बेटे विवेक ने मुखाग्नि दी।

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