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मधुमक्खी पालन की जिले में शुरूआत

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पच्चीस बीबॉक्सेस से समूहों ने शुरू किया मधुमक्खी पालन

सागर/बीना:- आजीविका मिशन से जुड़ी महिला समूहों ने आमदनी बढ़ाने के विभिन्न आयामों पर अपनी दस्तक शुरू कर दी है। बीना विकासखण्ड के पटकुई पंचायत के हासलखेड़ी ग्राम में श्रीराम स्व. सहायता समूह, सरस्वती स्व. सहायता समूह की महिलाओं ने मधुमक्खी पालन की शुरूआत की है। आजीविका ब्रांड से इनके द्वारा उत्पादित शहद आजीविका मार्ट बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सामने मेडीकल कॉलेज रोड पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। श्रीराम और सरस्वती दोनों समूहों की महिलायें जिनमें कल्पना सिंह, मिथलेश, शर्मिला, सीमा, गुड्डी, गीता, अभिलाषा, सुशीला, पूना बाई आदि ने इस काम की आज से शुरूआत की। महिलाओं का ग्राम स्तरीय प्रशिक्षण शुरू हुआ जिसमें विशेषज्ञ के रूप में मंडला जिले से निषार कुरैशी ने पालन प्रक्रिया और तकनीकी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मधुमक्खी का पालन उसकी हैंडलिंग एक परिवार में रहने वाले विभिन्न सदस्यों का परिचय शहद बनाने की प्रक्रिया मधुमक्खी के लिए आवश्यक भोजन और उनके शत्रुओं के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। अनूप तिवारी, जिला प्रबंधक, कृषि ने बताया कि एपिस मैलीफैरा प्रजाति की ये मधुमक्खियां शांत स्वभाव की होती हैं और दिन निकलने से दिन ढलने तक लगातार फूलों पर बैठकर पराग इकट्ठा करती हैं और शहद बनाती हैं। एक दिन में 1 किलो मीटर के दायरे में ये मधुमक्खियां लगभग दो हजार चक्कर लगाती हैं। मधुमक्खी पालन से ग्रामीण किसानों की उत्पादन वृद्धि और आजीविका के एक नये काम की जिले में शुरूआत हुई है। इनसे मिलने वाले शहर में शुद्धता की पूरी गारंटी होती है। इसके साथ ही किसानों को फूलों की खेती का विकल्प चुनने का रास्ता खुल जायेगा।

कलेक्टर दीपक सिंह ने बताया कि स्व. सहायता समूहों की इन महिलाओं ने अपना तकनीकी कौशल विकसित करते हुए शहद उत्पादन का अभिनव प्रयोग प्रारंभ करके अपने आगे बढ़ने के रास्तों को खोला है।
डॉ. इच्छित गढ़पाले, मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि बाजार में शहद की बड़ी मांग होती है। परन्तु जिले में शहद उत्पादन नहीं होने के कारण इस बाजार पर दूसरी कंपनियों का कब्जा है। स्व. सहायता सूमह की महिलाओं ने शहद के ग्राहकों तक शुद्धता के साथ उनका उत्पादन पहुंचाने के लिए ये पहल की गई है। महिलाओं को आजीविका के सभी संभावित विकल्पों से जोड़ा जा रहा है।

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