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अपने घर से निकले कचरे को खाद में तब्दील होते देख दंग रह गए बच्चे

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आजादी का अमृत महोत्सव के तहत स्मार्ट सिटी ने स्कूली बच्चों को कराया आईएसडब्ल्यूएम प्लांट का भ्रमण

विद्यार्थियों ने आईसीसीसी में हो रहे कमांड एंड कंट्रोल के काम को भी जाना

सागर:- हमारे घर से रोज कचरा ले जाने वाली गाडी को देखकर हम सोचते थे कि इसे शहर के बाहर किसी स्थान पर फेंक दिया जाता होगा, जिससे वहां कचरे का पहाड़ बन गया होगा, लेकिन आज यह प्लांट देखकर समझ में आया कि यह कचरा तो बहुत उपयोगी है। इससे खाद बनाई जा रही है। औद्योगिक ईंधन में भी इसका उपयोग होता है। कचरे से आय भी हो सकती है। इस तरह की प्रतिक्रिया उन छात्र-छात्राओं ने दी, जिन्हें सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने आजादी का अमृत महोत्सव के तहत इंटीग्रेटेड सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट (आईएसडब्ल्यूएम) प्लांट का भ्रमण कराया। इसके बाद उन्हें इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में हो रहे कार्यों को भी दिखाया गया।

आदर्श सरस्वती शिशु मंदिर शिवाजी नगर के करीब 50 विद्यार्थियों और शिक्षकों को विशेष बस से भ्रमण पर ले जाया गया। शहर से गुजरते वक्त उन्हें स्मार्ट रोड पर हो रहे काम दिखाए गए। बताया गया कि ड्रेन और डक्ट क्यों बनाई जा रही हैं। सिग्नल पर ट्रैफिक कैसे कंट्रोल होता है। कैट आई, बुलयार्ड्स और जेब्रा क्रॉसिंग का क्या उपयोग है। इसके बाद उन्हें मसवासी स्थित आईएसडब्ल्यूएम प्लांट ले जाया गया। वहां उन्हें बताया गया कि आपके घर से कचरा गाडी जो कचरा लेकर जाती है, वह छोटे ट्रकों के माध्यम से डिपो में पहुंचता है। वहां से बडे ट्रक इस कचरे को लेकर इस प्लांट में आते हैं। यहां कचरा कैचर मशीन से ले जाकर प्रोसेसिंग में लाया जाता है। सबसे पहले एक मशीन गीला और बारीक कचरा को अलग और पॉलिथीन, प्लास्टिक, कपडा आदि को अलग करती है। इसके बाद गीला कचरा अलग-अलग पैनल में डंप कर दिया जाता है। इसमें एन्जाइम्स आदि डालकर एक निश्चित समय तक रखते हैं। जब यह कचरा कंपोस्ट हो जाता है तो मशीन द्वारा इसे रिफाइंड किया जाता है और यह कंपोस्ट खाद में तब्दील हो जाता है। यह खाद पेड-पौधों के लिए बेहद पोषक होता है। प्लांट के पास की बंजर, पथरीली जमीन पर भी इस खाद की मदद से बडे-बडे पौधे तैयार हो गए हैं। यहीं पर लैब भी बनाई गई है, जो खाद की गुणवत्ता की जांच करती है।

इसके बाद बच्चों को बताया गया कि पॉलिथीन-प्लास्टिक से निकलने वाले कचरे का उपयोग बिजली संयंत्र, सीमेंट फैक्टरी आदि में ईंधन के रूप में होता है। जो कचरा पूरी तरह अनुपयोगी होता है उससे लैंडफिलिंग की जाती है। लैंडफिल साइट भी इसी प्लांट के पास बनाई गई है। इसके अलावा बच्चों को कैटल कारकस भी दिखाया गया, जहां मृत मवेशियों-जानवरों का शवदाह किया जाता है। छात्रा महिमा रजक और छात्र मोहित पांडे ने बताया कि वे अभी तक सोचते थे कि उनके घरों से निकलने वाले कचरा को शहर के बाहर कहीं फेंक दिया जाता होगा। आज प्लांट विजिट के बाद पता चला कि यह कचरा तो बहुत उपयोगी है। इससे खाद बनाई जाती है। कचरा से भी आय हो सकती है, ऐसा तो पहले कभी सोचा भी नहीं था। छात्र पुष्पेन्द्र दांगी और छात्रा सिद्धी दुबे ने बताया कि सागर स्मार्ट सिटी के कारण आज हमें बहुत उपयोगी जानकारी हासिल हुई है। अब वे अन्य विद्यार्थियों और अपने परिजनों को भी बताएंगे कि कचरे का सही तरीके से प्रबंधन हो तो यह उपयोगी भी हो सकता है। इस प्लांट के बनने से हमारा शहर स्वच्छ भी रहेगा।

आईएसडब्ल्यूएम प्लांट के विजिट के बाद सभी विद्यार्थियों को स्मार्ट सिटी कार्यालय में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर ले जाया गया। उन्हें बताया गया कि यहां से किस तरह ट्रैफिक, क्राइम, बीमारियों और कचरा गाडियों पर नियंत्रण किया जाता है।

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