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कहानी एक ऐसे सफल किसान की, खेती करना जिसका जुनून हैआकाष चौरसिया

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संपूर्ण देष में युवा किसानों के लिए बने प्रेरणा

सागर- यह कहानी किसान परिवार में जन्मे आकाश चौरसिया की है। जिनका जन्म ग्राम तिली सागर मध्य प्रदेश में हुआ। इनके माता-पिता पान की कृषि करते हैं। आकाश हायर सेकण्ड्री की शिक्षा प्राप्त करने के बाद डाक्टर बन लोगों का इलाज करना चाहते थे। परन्तु 21वीं सदी की बढ़ती आबादी एवं इस आबादी में बढ़ती अस्पतालों की संख्या वा बीमारियों की भीड़ को देखकर जहर मुक्त अनाज खिलाने के उद्देश्य से आकाष ने जैविक कृषि करने का संकल्प लिया। लगातार कड़ी मेहनत और परिश्रम से जैविक कृषि से बागवानी, उद्यानकी, जैविक खाद उत्पादन एवं अनाज वाली फसलों का सर्वोत्तम उत्पादन हासिल किया। आज पुरे देश में युवाओं को जोड़कर स्वाबलंबी कृषि को बढावा देने के लिये कार्य कर रहे है।


उन्होंने कृषि के क्षेत्र में कई अनुसंधान एवं नवाचार किए है। जिनमें पांच लेयर फार्मिग मॉडल, जिसमें वे एक साथ एक ही जमीन पर एक समय में 5-5 फसले लेते हैं। प्रथम फसल के रूप में जमीन के अंदर 2 इंच की गहराई व 6 इंच की चौड़ाई पर अदरक या हल्दी, द्वितीय फसल के रूप में जमीन की सतह पर चौलाई भाजी, पालक भाजी, धनिया पत्ती आदि, तृतीय फसल के रूप में जमीन की सतह से 6.5 फीट की ऊंचाई पर बनाए गए जाले पर 5-5 फीट के अंतर से लगाकर कदु, पड़ोरा, परवल, करेला आदि में से कोई एक वेल वाली, चौथी फसल के रूप में जमीन और जाले के बीच में खाली स्थान पर 2-2 फीट के अंतर से गिलकी, लौकी खीरा आदि में से कोई एक तथा पाँचवीं फसल के रूप में देसी पपीते को लेते हैं जो जाले से ऊपर फल देते हैं। इस मॉडल में कीड़ों का प्रकोप कम होता है। मौसम परिवर्तन का प्रभाव नहीं होता साथ ही खाद की कम आवश्यकता होती है। इस तरह इस मॉडल में एक साथ पाँच फसलों को उगाकर पाँच गुना आमदानी होती है।


आकाष चौरसिया प्रत्येक माह में कैम्प के द्वारा अन्य किसानों को भी इस मॉडल के बारे में प्रषिक्षण देते हैं। उन्होंने बताया कि, देष भर में करीब दस हजार किसानों द्वारा यह मॉडल अपनाया जा चुका है। पूर्ण रूप से जैविक होने के कारण फसल की गुणवत्ता भी अत्यधिक होती है। चौरसिया को उनके द्वारा किए गए नवाचारों के लिए देष के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ विभिन्न उच्च संस्थानों द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।      

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