सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब कांड के बाद अब मेथनॉल यानी मिथाइल अल्कोहल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जांच में शराब में मेथनॉल की आशंका जताई गई थी। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए और कई मौतों की सूचना सामने आई। प्रशासन ने मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
मेथनॉल क्या है?
मेथनॉल एक जहरीला औद्योगिक रसायन है। यह सामान्य पीने वाली शराब में मौजूद एथेनॉल से अलग होता है। देखने में दोनों तरल पदार्थ समान हो सकते हैं, लेकिन मेथनॉल इंसान के लिए बेहद खतरनाक है।
मेथनॉल शरीर में पहुंचकर क्या करता है?
मेथनॉल शरीर में जाने के बाद यकृत में टूटकर ऐसे जहरीले पदार्थ बनाता है जो शरीर के लिए गंभीर नुकसानदेह होते हैं। इनमें फॉर्मिक एसिड प्रमुख है। इसका असर विशेष रूप से आंखों की नस और मस्तिष्क पर पड़ सकता है।
इसी वजह से मेथनॉल विषाक्तता में शुरुआत में नशे जैसे लक्षणों के बाद सिरदर्द, उल्टी, पेट दर्द, चक्कर, कमजोरी, तेज या असामान्य सांस, धुंधला दिखना और गंभीर स्थिति में बेहोशी या मौत तक हो सकती है।
आंखों की रोशनी क्यों जा सकती है?
मेथनॉल विषाक्तता में बनने वाले जहरीले पदार्थ आंखों की ऑप्टिक नर्व और उससे जुड़े ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी कारण मरीज को धुंधला दिखाई देना, नजर कम होना या गंभीर मामलों में स्थायी दृष्टि-हानि हो सकती है।
सागर मामले में भी हाल की रिपोर्टों में कुछ पीड़ितों द्वारा धुंधला दिखने और आंखों की रोशनी कम होने की शिकायत सामने आई है।
जहरीली शराब में मेथनॉल कैसे पहुंच सकता है?
अवैध और अनियंत्रित शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे पदार्थों तथा रसायनों की गुणवत्ता और संरचना का भरोसेमंद नियंत्रण नहीं होता। इसी तरह औद्योगिक रसायनों की मिलावट या गलत तरीके से इस्तेमाल होने पर शराब जहरीली हो सकती है।
हालांकि किसी घटना में वास्तव में मेथनॉल मौजूद था या नहीं, इसकी पुष्टि केवल अधिकृत प्रयोगशाला जांच से ही की जा सकती है। इसलिए सागर मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही माना जाना चाहिए।
सबसे बड़ा खतरा क्या है?
मेथनॉल विषाक्तता का सबसे बड़ा खतरा यह है कि शुरुआती घंटों में व्यक्ति को स्थिति उतनी गंभीर महसूस नहीं हो सकती। बाद में विषाक्त पदार्थों का प्रभाव बढ़ने पर आंखों की रोशनी, सांस और मस्तिष्क पर गंभीर असर पड़ सकता है।
क्या करना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति ने संदिग्ध या अवैध शराब पी है और उसके बाद धुंधला दिखना, उल्टी, तेज सिरदर्द, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे आपात स्थिति मानना चाहिए और तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
मेथनॉल विषाक्तता का इलाज अस्पताल में किया जाता है। चिकित्सक आवश्यकता के अनुसार विशेष एंटीडोट और अन्य उपचार दे सकते हैं। सागर में भी मेथनॉल के प्रभाव को रोकने वाले फोमेपिजोल (Fomepizole) एंटीडोट के इस्तेमाल की रिपोर्ट सामने आई है।
सागर मामले में कार्रवाई
सागर जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है। रिपोर्टों के अनुसार अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और कुछ फरार आरोपियों की तलाश जारी रही। प्रशासन ने आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर भी कार्रवाई की है।
निष्कर्ष: मेथनॉल कोई पीने योग्य अल्कोहल नहीं है। इसकी मौजूदगी वाली संदिग्ध शराब जानलेवा विषाक्तता पैदा कर सकती है और विशेष रूप से आंखों की रोशनी को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। सागर की घटना में मेथनॉल की भूमिका से जुड़े अंतिम तथ्य जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट से स्पष्ट होंगे।
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